बुधवार, 31 दिसंबर 2008

नया साल है !

 

नया साल है लेकिन प्यारे,
वही पुराना भात,
पुरानी वही दाल है
बस, नया साल है !

कैसे इनसे बच पाओगे
वही पींजरे सदा पुरातन
और पुरानें वही जाल है
नया साल है !

तलवारें भी वही पुरानी खिंची हुई हैं
अपने हाथों में भी यारों,
टूटी फूटी वही ढाल है
कहने को यह नया साल है !!

उसी पुराने कूएं में रह रही मेंढकी
ठुकवाना पर चाह रही वह
नयी नाल है, शायद कोई नयी चाल है
नया साल है !!

बेहालों की बढ़ी जमातें इस दुनिया में,
थोडे ही हैं जो खुश हैं,
या जो निहाल है।
नया साल है !!

हम पर तो है कृपा प्रभू की,
आप लिखें-
जो उधर हाल हैं, जो खयाल हैं।
नया साल है !!

आप और आपके परिवार पर भी नववर्ष २००९ में प्रभु की असीम कृपा बरसे ! बधाइयों सहित बुधकर परिवार की ओर से स्‍वीकारें अनेक मंगलकामनाएं !!

संगीता और डॉ. कमलकांत
डॉ. मृणाल और सौरभ
पारुल और पल्लव
कुमारी अपरा, कुमार अथर्व और कुमार अद्वय

1 जनवरी 2009

8 टिप्‍पणियां:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

वही चाल है वही ढाल है
इधर उधर सब तरफ
वही हाल है वही हाल है!

अशोक मधुप ने कहा…

उसी पुराने कूएं में रह रही मेंढकी
ठुकवाना पर चाह रही वह
नयी नाल है, शायद कोई नयी चाल है
नया साल है !!

बिलकुल सही कहा आपने। साते आते हैं चले जाते हैं कुछ भी तो कहीं नही बदलता।
क्योकि हर वस्तु का व्यवसायीकरण हो रही है अत: व्यापारियों ने इसका व्यसायिकरण किया तो यह भी मनाया जाने लगा। इन सबके बावजूद आपको नव वर्ष की शुभकामंनाए ।

अशोक मधुप ने कहा…

उसी पुराने कूएं में रह रही मेंढकी
ठुकवाना पर चाह रही वह
नयी नाल है, शायद कोई नयी चाल है
नया साल है !!

बिलकुल सही कहा आपने। साल आते हैं चले जाते हैं कुछ भी तो कहीं नही बदलता।
क्योकि हर वस्तु का व्यवसायीकरण हो रही है अत: व्यापारियों ने इसका व्यसायिकरण किया तो यह भी मनाया जाने लगा। इन सबके बावजूद आपको नव वर्ष की शुभकामंनाए ।

SACHIN JAIN ने कहा…

main bhi soch raha tha ki kuch nae saal par likhoon........par kuch nahi samajh aa raha tha..........aapke vichaar uttam lage.................

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

नव वर्ष सपरिवार
मँगलमय हो
और आपकी लेखनी यूँही
सच लिखती रहे -
स स्नेह,
- लावण्या

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बहुत अच्छी और सच्ची रचना...
आप को भी नव वर्ष की शुभ कामनाएं...
नीरज

अजित वडनेरकर ने कहा…

बहुत बढ़िया रचना।
सच्ची बात
हर दिन वही हाल है।
नया साल मुबारक हो आपको भी
जै जै

ऋषभ ने कहा…

नव संवत्सर शुभाकांक्षा




गए बरस की दहशतगर्दी


ठिठुरन सी भर गई नसों में,


नया बरस


कुछ तो गरमाहट लाए .........