शुक्रवार, 30 जनवरी 2009

योग, उद्योग और राजोद्योग

एक समाचार एजेंसी ने लिखा है कि 'आजकल बाबा पूरी तरंग में हैं।' बाबा यानी अपने बाबा रामदेव। वे भी हरिद्वारी हैं और अपनेराम भी । अपनेराम और बाबा के बीच सात्विक किस्‍म के बड़े वैध संबंध हैं। वे मूलत: इसी धरती के हैं पर इन दिनों ऊंचे आकाश में उनकी सफल  उड़ान के सभी क़ायल हैं। बाबा हरियाणा से चलकर हरिद्वार के हुए और हरिद्वार में रम-जम गए। हरिद्वार ने और यहां के भगवे माहौल ने बाबा के योग को प्राय: उद्योग में तब्‍दील कर दिया है। जो थोड़ा बहत बचा है उसेू भी जल्‍दी ही कर देंगे। मार्केटिंग और दूकानदारी के ज़माने बाबागीरी भी पीछें नही है।

बाबा ने जब जब जो जो किया अपनेराम ने तालियां बजाईं। पर बाबा रामदेव से अपनेराम को ये उम्‍मीद नहीं थी। अच्‍छे-खासे आसन-प्राणायाम करवा रहे थे। सारा देश उनके कहने से कपालभाति कर रहा था। पर उनके अपने कपाल में ये भूत पता नहीं कैसे घुस गया  कि देश का सुधार करना है। आजकल वे कि वे राष्‍ट्र को सुधारने के लिये योगमंच से राजनीतिक अखाड़चियों को ललकार रहे हैं।

प्‍लीज, ऐसा न करो बाबा। आपकी चल गई इसका मतलब ये तो नहीं कि आप औरों की चलती हुई बन्‍द करने पर उतारू हो जाएं। अरे बाबा जी महाराज, अगर इस देश की राजनीतिक गंदगी को आपने अपने भारत स्‍‍वाभिमान ट्रस्‍ट की झाडू ये बुहार दिया तो उनका क्‍या होगा जो गन्‍दे रास्‍तों से चुने जाते हैं और फिर सारी मानसिक गंदगी अपने साथ लिये संसद में पहुंचते हैं।

यह जो कहा जा रहा है कि  'आजकल बाबा पूरी तरंग में हैं'  य‍ह वाक्‍य अपनेराम के ख़याल से अधूरा है। अपनेराम इसमें सुधारपूर्वक जोड़ना चाहते हैं कि गगनविहारी अपने बाबा आजकल पूरी तरह से रंग में हैं, तरंग में हैं और हवा में उड़ रहे तुरंग पर हैं। वे राष्‍ट्रीय से अंतर्राष्‍ट्रीय क्‍या हुए राष्‍ट्रवाद के अकेले ऐसे पुरोधा बन गए हैं जिन्‍हें देश की ओवर हॉलिंग की चिंता के कारण आजकल बिलकुल नींद नहीं आती है। कभी कभी लगता है बाबा की गाड़ी पटरी बदल रही है।

वैसे बाबा योगी हैं। इसलिये उन्‍होंने देश की नब्‍ज पकड़ ली है। वे समझ गए हैं कि ये देश बीमार है। जबसे आज़ाद हुआ है तभी से बीमार है। बीमारी का इलाज डॉ. कांग्रेस, डॉ. भाजपा, डॉ. बसपा, डॉ. सपा, डॉ. माकपा, डॉ. भाजपा, डॉ. कपा आदि अनेकानेक नामी-गिरामी डाक्‍टर कर चुके हैं पर देश की एक बीमारी कम या दूर होती है तो दूसरी उभर आती है। सब हैरान परेशान हैं कि देश को बीमारी से निजात कैसे मिले। बाबा ने इसके लिये योग का संयोग तलाशा है। आज की तारीख में जिस देश को गीता का कर्मसंदेश और लाखों भगवाधारियों का धर्म सन्‍देश नहीं सुधार पा रहा है उसे बाबा के रास्‍ते पर चलाने की मुहिम शुरू हो गई। अपने बाबा ने राष्‍ट्रीय बीमारियों का इलाज खोज लिया है और अमल में लाना शुरू भी कर दिया है।

वे योग से आदमी का इलाज तो करते ही थे, अब वे उसी से देश की कथित गन्‍दी राजनीति का  इलाज भी करने वाले हैं। जो काम साठ साल में संविधान, कानून, नेता सरकार नहीं कर पाए उसे करने के लिये एक योगी ने झण्‍डा थाम लिया है। बाबा का मूड देखकर लग रहा है कि अब यह देश या तो योगियों का रहेगा या फिर भोगियों का। देश मेरे, बाबा की यह मुहिम अगर सफल हो गई तो बाबाराज आया ही समझो। योग से उद्योग और उसके बाद फिर राजोद्योग। यही राजयोग पथ है।

अपने लो‍कतंत्र के सारे डॉक्‍टर घबराए हुए हैं कि अगर बाबा के  इलाज ने जोर पकड़ लिया तो उनकी दूकान पर कौन आएंगा। कुछ तो उस दिन को कोस रहे हैं जब उन्‍होंने और उनकी सरकारों ने बाबा और बाबा के जादू को अपने सिर पर बिठाकर देश को योगडांस दिखाया था।

अब  बाबा ने बीमार लोकतंत्र से कहा है कि वह सामाजिक मूल्‍‍यों का हनन करने वाली पार्टियों का बहिष्‍कार करें। बाबा कहते हैं कि संसद में अनपढ़ न जाए, अपराधी न जाए, गैर-जि़म्‍मेदार चरित्रवाले न जाए। वे धड़ाधड़ चिटिठयां लिख रहे हैं। देश की सात राष्‍ट्रीय,  चवालीस राज्‍श्‍यस्‍तरीय और 179 पंजीक़त राजनीतिक दलों के पास बाबा के फरमान पहुंच गए हैं कि अपने उम्‍मीदवारों की सूची में ढंग के लोग लाओ वरना......।

अब ये भी कोई बात हुई। साठ साल तक खूनपसीना एक करके हमारे नेताओं ने लोकतंत्र के मंदिर के द्वार इन्‍हीं लोगों के लिये तो खुलवाए हैं। लगता है बाबा को इस बड़ी जमात की कोई चिंता ही नहीं है। गजब कर दिया बाबा ने। अब क्‍या होगा। अगर बाबा का कहना लोकतंत्र ने मान लिया तो पार्टियां चुनाव में किसे उतारेंगी। बाबा की चिट़ठी से भारी अकुलाहट है। लोकतंत्र खुद हैरान परेशान है कि अब उसे आसन प्राणायम करना ही पड़ेगा। समाप्‍त।

5 टिप्‍पणियां:

Sushant Singhal ने कहा…

सुन्दर ! अति सुन्दर ! बात को सलीके से कहने की आपकी शैली मुझे हमेशा से ही चमत्कृत करती चली आ रही है।

सुशान्त सिंहल

संगीता पुरी ने कहा…

ईश्‍वर करे , बाबा की यह मुहिम सफल हो....

अजित वडनेरकर ने कहा…

"अपने लो‍कतंत्र के सारे डॉक्‍टर घबराए हुए हैं कि अगर बाबा के इलाज ने जोर पकड़ लिया तो उनकी दूकान पर कौन आएंगा।"

बहुत बढ़िया पोस्ट है जी...व्यंग्य लिखनें में भी आप लाजवाब हैं...ज्यादा धार दिखा दी तो पुराणिकजी हरिद्वार ही आ बसेंगे...हा हा हा
:)

विष्‍णु बैरागी ने कहा…

बाबाजी सरे देश को ठीक करने पर तुले हैं और आप बाबाजी को। देखते हैं, पहले कौन थकता है। वैसे, अपने राम आपसे सहमत हैं। एक वक्‍त पर एक काम, दो करो तो काम तमाम।
आपका तो उनसे रोज का मिलना है। सो, बाबाजी को सयानों की सलाह पेश कीजिएगा-

एकै साध्‍ो सब सधे, सब साधे सब जाय।
जो तू सींचै मूल को, फूले फले अघाय।।

Saurabh ने कहा…

Daddy lekh badhiya hai. Aaj se padhna shuru kiya hai. Sushant ji ne bahut pate ki baat likhi hai. Sach hai.